Sunday, 1 November 2026

भक्ति सूत्र

भक्तिसूत्र प्रेम-दर्शन देवर्षि नारद विरचित सूत्र-१

#ये_स्त्री-पुरुष_का_जो_चोला_है_ये_तो_एक_छलावा_है
मेरी प्यारी सखियों!!वैदिक साहित्य की मर्मस्पर्षी श्रँञ्खला के अन्तर गत मैं आज से आप सबकी सेवामें देवर्षि नारद कृत भक्ति-सूत्र की स्वलिखित बाल-प्रबोधिनी प्रस्तुत कर रही हूँ!!आप सबके ह्यदय में स्थित मेरे प्रियतमजी श्री कृष्ण जी के चरणों में इसका प्रथम सूत्र-पुष्प चढा रही हूं--

#अथातो_भक्ति_जिज्ञासा।।१।।
सखियों!!कभी कभी आपमें बहुत से पुरुष,साधू, सन्यासी,सोचते होंगे कि मै लगभग हमेशा  आप सबको---#सखी_क्यूं_सम्बोधित_करती_हूँ,!!
लेकिन वो तो मैं करूंगी ही, क्यों कि!!एक मेरे पिया!! जी ही अखिल ब्रम्हाण्ड में पुरुष हैं और बाकी हम सभी उनकी सखियाँ!!

ये हो सकता है कि मेरी भौतिकीय संरचना स्त्री की और आपकी पुरुष की है,किंतु ये स्त्री-पुरुष का जो चोला है,ये तो एक छलावा है!न जाने कितने जन्मों  में !!मैं!! आप!!स्त्री-पुरुष बदल बदल कर बने होंगे, अरी!!मैं तो यह भी नहीं जानती कि कितने जन्मों में मैं शूकरी,कुतिया,बंदर,कीट, पतंगा,बिच्छू ,विष्टा की कृमि,छिपकली,वृक्ष,तृण, कदम्ब,बिल्ली,नागिनऔर भी न जाने क्या-क्या बनी होउँगी,लेकिन उनके और उन जन्मों के संस्कार!!! मैं तो अपने लिये यही कहूंगी कि----

#कुतिया_से_हिरनी_बनी_हिरनी_से_बनी_गाय।
#गाय_से_ब्राम्हणी_बनी_पर_जाति_स्वभाव_न_जाय।
कल मेरे किसी निबंध पर मेरे एक मित्र ने प्रश्न भी किया था कि-क्या शुद्र!!! कभी  किन्हीं कर्मों से ब्राम्हण बन सकता है ?
तो हाँ!!मैं नहीं-भक्ति सूत्र यही कहता है कि ,हाँ!!वह बन सकता है। और यह धीरे धीरे आगे यह स्पष्ट होता भी जायेगा।

#अथातो_भक्ति_जिज्ञासा मानव जीवन का मुख्य उद्रेश्य ही यही है,प्यारी सखियों!!एक बात कहूं!! भक्ति" स्त्री वाचक है---यही तो ज्ञान,वैराग्य,जिज्ञासा, योग जैसे बालकों की जननी है-
#प्रभू_कृपा_तब_जानिये_जब_दें_मानव_अवतार।
#गुरू_कृपा_तब_जानिये_जब_मुक्त_करें_संसार।।
न जाने कितने जन्मो के सद्कर्मों के परिणाम स्वरूप मानव का जन्म मिला !!!और फिर इसमें भी!!!  #मा_नव=नयी नयी कोखों में ही जाने की तैयारी आखिर क्यों करती रहती हूँ मैं ?

#पुनरपि_जननं_पुनरपि_मरणं,
       #पुनरपि_जननी_जठरे_शयनं।
#इहू_संसारे_खलु_दुश्तारे,
        #कृपया_पारे_पाहि_मुरारे।।
तो प्रिय सखियों!! #आहार_निद्रा_भय_मैथुनश्च

निद्रा,भोजन,संभोग,भय!!ये सब तो हममें ही क्या !!पशुवों में भी है,यही तो  "दिब्य ऋषि नारद" जी कहते हैं कि अगर तुम अपने को #मानव मानते हो !!!तो !!तुम्हारे में भक्ति कैसे प्रकट हो  ?भक्ति है क्या ?
यह जिज्ञासा अवश्य होनी चाहिये,और इस जिज्ञासा के जागने की पहली शर्त है पुरुषत्व-स्त्रित्व के अभिमान को छोडकर--- आओ मेरी सभी सखियों तथा प्रिय सखा वृंद,मेरे साथ!! हम सब पहले  #नारी_न_अरी_बन_जायें_शत्रु_हीन_बन_जायें
यही इस सूत्र का भाव है... #आपकी_सखी_सुतपा!!
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अपनी सांस्कृतिक विरासतों को अक्षूण्य रखने के प्रयासान्तर्गत आपके लिये मैं एक उपहार आज प्रस्तुत कर रही हूँ!! मेरे प्रिय प्रियतमजी तथा प्यारी भारत माँ के श्री चरणों में यह वेबसाइट प्रस्तुत करती हूँ!!आप सभी से आग्रह है कि इस दिये गये लिंक पर क्लिक कर वेबसाइट को #लाइक करते हुवे अपनी अमूल्य टिप्पणियाँ अवस्य ही देंगे--

Friday, 21 March 2025

Friday, 21 February 2025

विज्ञान भैरव तंत्र

विज्ञान भैरव तंत्र सूत्र~मंत्र-९९ विधि-७५~३ अंक~२१६
प्रिय ! अब इस अद्भुत श्रृंखला में मैं "विज्ञान भैरव तंत्र"के ९९ वें श्लोक की व्याख्या में प्रस्तुत कर रहा हूँ,-भैरवी सिद्धि की ७५ वीं विधा का तृतीय अंक-
#निर्निमित्तम्_भवेज्_ज्ञानं_निराधारम्_भ्रमात्मकम् ।
#तत्त्वतः #कस्यचिन्_नैतद्_एवम्भावी_शिवः #प्रिये ॥
हाँ ! इच्छा किसी भी प्रकार की हो, वो एक अद्वितीय शक्ति है ! और शक्ति अहंकार की भगिनी हैं 
सूत्रानुसार ये काम,क्रोध, लोभ,मोह हों अथवा कि दैहिक-दैविक-भौतिक ताप ! सांसारिक दृष्टि से भोगवाद एवं आध्यात्मिक दृष्टि से योगवाद ये दोनों ही रस्सी के दो छोर हैं ! इनके बीच अनादि काल से चलती रस्साकशी एक ऐसा द्वन्द्वयुद्ध है जिसके प्रतिद्वंदी प्रतिपक्षी अर्थात- " #देवासुर " मनुष्येतर हैं ! ये वही प्राचीनतम कथानक है जहाँ से #कुम्भ पर्व का प्रारम्भ हुवा ! हम उनकी उपासना करेंगे अथवा नहीं करेंगे ?
आत्मीय स्वजनों-यह सनातन सत्य है कि-"असत्य" को सत्य परिभाषित करने से नाना मतान्तरों का ये अभिशप्त अभिप्राय रहा है कि उन्होंने-"शक्ति और ज्ञान" को पृथक-पृथक देखते-देखते इनके दृष्टा अर्थात अपने-आप को ही भुला दिया।
मित्रों ! श्रीमद्भगवद्गीता त्रयोदश अध्याय अर्थात-"क्षेत्र क्षेत्रज्ञद्वी विभाग" योगाध्यायान्तर्गत-"श्रीकृष्ण कालिका" ने इसे ही स्पष्ट करते हुवे कहा है कि भूमि और भूमिज्ञ अर्थात कृषक और भूमि 
वहाँ ये स्पष्ट करते हैं कि-
"इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते ।
एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः ॥ 
हे कुन्तीपुत्र ! यह शरीर ही क्षेत्र (कर्म-क्षेत्र) कहलाता है और जो इस क्षेत्र को जानने वाला है, वह क्षेत्रज्ञ (आत्मा) कहलाता है, ऎसा तत्व रूप से जानने वाले महापुरुषों द्वारा कहा गया हैं। 
यहाँ यह गुप्त रूप से अस्पष्ट है कि यही-"तत्त्वज्ञान" है।
अर्जुन को उनकी माता का स्मरण दिलाकर ये कहा गया है ! यहाँ यह उल्लेखनीय है कि माँ कुन्ती की सभी सन्तानें-"मानस शक्ति " से उत्पन्न हुयीं ! अर्थात-"इच्छा से उत्पन्न सन्तान ही संसार है !"
"मूंदहुं आँख कतहूँ कछु नांहीं" किन्तु-"कर विचार देखहुं मन माहीं"।
मित्रों ! भगवती सदृश्य सुतपा माँ के साथ मैंने इस श्रृंखला का प्रारम्भ भैरवी सिद्धि की नाना विधाओं हेतु किया था ! हमारे आप सभी  के मार्गदर्शन हेतु किया था ! "निर्निमित्तम् भवेज् ज्ञानं" वो निमित्त 
अर्थात इच्छा ही पुनश्च इस ज्ञान में हेतु बनने को उत्सुक है ! और किस बिन्दु पर इच्छा और ज्ञान का पटाक्षेप हो जायेगा  तदर्थ- "ब्रह्मसूत्रपदैश्चैव हेतुमद्भिर्विनिश्चितैः"ततत मैं ह्रदय से कहता हूँ कि हमदोनों की -इस जीवन की अंतिम इच्छा केवल-"कैवल्य" की व्याख्या करते करते श्मशान वास करने की है ! और वो इसलिए भी कि पुनश्च उसी कैवल्य की व्याख्या हेतु-"जायते ही ध्रुवो मृत्युः ध्रुवो जन्म मृतश्य च"।
माँ मुझसे सदैव कहती हैं कि-"मैं और तूं अलग अलग नहीं हैं ! हो भी नहीं सकते ! तुझे मेरी शक्ति का आभास नहीं है ! मुझे तेरा ज्ञान नहीं है ! शक्ति का आभास अर्थात ज्ञान होना ही अहंकार में हेतु है-"का बल साधि रहै हनुमाना" इसे निराधार ही रहने दो-"निराधारम् भ्रमात्मकम्" ये निराधार होने का भ्रम ब्रम्हाण्ड के सभी आधारों का आधार है।
मैंने ये समझा है कि शक्तिशाली होने का एकमात्र उपाय है-
"तपबल जपबल और बाहुबल चौथो बल है दाम।
ये सब बलशाली के बल हैं- "हारे को बल राम॥"
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि-
"एक राम दशरथ घर डोला,एक राम घटो घट बोला।
एक राम का सकल पसारा चौथो राम इन सबसे न्यारा॥"
संत शिरोमणि तुलसीदास जी ने उन्हीं को-"हारे को बल राम" कहा है ! अनेकानेक दिवसों के पश्चात पुनश्च इस श्रृंखला के नवीन अंकों को प्रस्तुत करने का सौभाग्य मिला ! आप सभी की पावन स्मृति से मिला ! अभी भी इस विधा का भाव अधूरा है शेष.....सुतपा-आनंद....सचल दूरभाष क्रमांक ६९०१३७५९७१

Saturday, 23 February 2019

भारत

ऐ मेरे वतन के लोगों-जरा आँख में भर लो पानी अंक-३३

मेरे प्रिय सखा तथा प्यारी सखियों!!आज पुनश्च मैं आपके समक्ष सम-सामयिक भारतीय राजनैतिक घटनाक्रम के परिप्रेक्ष्य में "पाकिस्तानी सेेना तथा उसके द्वारा संरक्षित अलगाववादी तथा आतंकवादी संगठनों" के संदर्भ में कुछ कहना उचित समझती हूँ!!

हे प्रिय!!यह वही "जैश ऐ मोहम्मद "आतंकवाद की फैक्ट्री है जहाँ मदरसे के नाम पर जेहादी हैवानों की फसल उगायी जाती है!!
वैसे इस एक ही "शैतानी-बंकर"में जैश-ए-मोहम्मद, मदरेसातुल असाबर, जामा मस्जिद पाकिस्तान के पारमाणविक हथियारों के जखीरे, रासायनिक हथियार,विशाल और अत्याधुनिक आतंकवाद प्रशिक्षण केन्द्र भी यहीं दुनिया की नजरों में धूल झोंक कर बने हुवे हैं!!

वैसे इसकी स्थापना तो मसूद अज़हर ने मार्च २००० में कंधहार काण्ड से छूटकर पाकिस्तान जाकर वहाँ की सरकार के सहयोग से की थी-"ख़ुद्दाम उल- इस्लाम​" भी इसी में संचालित होता है!! और हे प्रिय!!यह आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आई•एस•आई• की सभी गतिविधियों का केन्द्र यह स्थान और अज़हर अब बन चुका है!!

और वैसे भी पाकिस्तान का यह इतिहास रहा है कि सन् १९४७ में ही आई•एस•आई• की स्थापना कबायली हमवों के असफल हो जाने के बाद कायदे आजम जिन्ना के संकेत से की गयी थी!!और इसको फलने फूलने के लिये सोवियत-संघ को तोड़ने के लिये धीरे-धीरे अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने खाद दी थी!!

वैसे यह भी मैं कहना उचित समझती हूँ कि इस संगठन की स्थापना सन् १९५४ में कश्मीर में अनुच्छेद 35A जोड़ने के तद्कालीन भारतीय संसद के विधेयक का लाभ उठाकर कश्मीर में अलगाववादी संगठनों को संरक्षण देने हेतु की गयी थी!!

किन्तु इस रक्तबीज रूपी भष्मासुर ने अपनी गतिविधियों को कई आयाम दिये- इसने कश्मीर ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान,सीरिया,ईराक,ईरान, पाकिस्तान और स्वयं अमेरिका में भी सुन्नी लोगों को प्रभावित कर लगभग इन सभी देशों में अलगाववादी और आतंकवादी दोनों प्रकार के संगठनों की मजबूत नींव रख दी!!

हे प्रिय!!और एक नवीन भूल भी सन् १९८० के दशक में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सी•आई•ए•ने की- लाहौर विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के प्रोफ़ेसर हाफिज़ मोहम्मद सईद के द्वारा "लश्कर ऐ तैयबा"की स्थापना में सहयोग किया!!

और इसका उद्देश्य अफ़ग़ानिस्तान से रूसी सेनाओं को हटाना मात्र था- इस संगठन ने अपनी स्थापना  "वहाबी इस्लाम के आदर्श पर की थी!! और वहाबी ये वही नाम है जिसे भारत में भी आप "वहाबी और देवबंद उलूम"के रूप में जानते हैं!!

अब सोवियत संघ के टूटने के बाद जब रूसी सेना   अफगानिस्तान से हट गयी तो इसका उपयोग पुनश्च इराक और ईरान के पेट्रोलियम पदार्थों पर कब्जा करने के लिये "अल-कायदा" से इसे जोड़कर उन क्षेत्रों में प्रभावी किया गया!! किन्तु पाकिस्तान का उद्देश्य तो भारतीय कश्मीर था!!

और अंततः अलकायदा तथा लश्करे तैयबा ने अमेरिकी हथियारों से ही अमेरिका और भारतीय कश्मीर पर हमले करने शुरू कर दिये!!वस्तुतः कश्मीरी पंडितों को वहाँ से निकालने की ये एक पूर्व नियोजित शुरूआत थी!!

"शेष अगले अंक में लेकर उपस्थित होती हूँ!! #सुतपा" मैं आपसे आग्रह करती हूँ कि इस लेख पर अपने अमूल्य विचार अवस्य रखें!!तथा इसे ज्यादा से ज्यादा अग्रेषित करें!!

आपकी वेबसाइट-
www.sutapadevi.in

आप नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करके मेरे समूह #दिव्य_आभास से भी जुड़ सकते हैं-
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इसके अतिरिक्त आप टेलीग्राम ऐप पर भी इस समूह से अर्थात दिव्य आभास से जुड़ सकते हैं!! उसकी लिंक भी मैं आपको दे रही हूँ-
https://t.me/joinchat/AAAAAFHB398WCRwIiepQnw

ट्वीटर--- सुतपा
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ऐ मेरे वतन के लोगों-भाग-१
http://www.sutapadevi.in/?p=757
ब्रम्हसूत्र भाग -१
http://www.sutapadevi.in/?p=771
भक्ति सूत्र भाग-३ अंक ८१ से
http://www.sutapadevi.in/?p=888

शिवाष्टकम्-
http://www.sutapadevi.in/?p=939
पर्व सनातन-
http://www.sutapadevi.in/?p=982
नृसिंहावतार एक तथ्यात्मक घटना
http://www.sutapadevi.in/?p=1088

गोपिका विरह गीत
http://www.sutapadevi.in/?p=1144
ऋग्वेदोक्त विष्णुसूक्त
http://www.sutapadevi.in/?p=1150

ऐ मेरे वतन के लोगों-जरा आँख में भर लो पानी भाग-२
http://www.sutapadevi.in/?p=1246

भक्त प्रह्लाद

नृसिंहावतार एक तथ्यात्मक घटना, अंक~८

🙏#हम_आप_और_हमारे_आश्रित_सम्पूर्ण_कुटुम्ब_को_हम_नर्कों_के_द्वारों_पर_ढकेल_रहे_हैं!! 🍃

🍁#प्रळयरवि_कराळाकार_रुक्चक्रवालं_विरळय_दुरुरोची_रोचिताशांतराल।।

🍃#कथाप्रसेड़्गेषु_च_कृष्णमेव,
           #प्रोवाय_यस्मात्_स_हि_तत्स्वभावः।
🍁#इत्थं_शिशुत्वेऽपि_विचित्रकारी,
           #व्यवर्द्धतेशस्मरणामृताशः     ।।

🌺हाँ प्रिय!!नृसिंहपुराण(•४१•३४▪)का यह श्लोक है!!और आज के शिच्छा जगत् में इस श्लोक को यदि मैं अपने शिशुवों के हेतु कसौटी मान लूँ तो आमूल- चूल एक नयी क्रांति समाजमें संभव हो सकती है! समाज में एक नयी क्रांति की जन्म-दात्री हो सकती है!!मैं आपको एक भेदकी बात बात बताती हूँ--

🌹#माँ_और_बचपनकी_स्मृतियाँ_प्रथम_गुरू_होती_हैं हमारी,परम् भागवत् कयाधू और देवर्षि नारदजी के संस्कारोंसे बाल मनतो प्रभावित था ही प्रहेलादका!

🌺किंतु शास्त्रीय संस्कारोंके अंतर्गत भौतिकीय जीवन में नाम का अप्रतिम योगदान होता है!!इस हेतु ऋषियोंनें #नामकरण_संस्कार की व्यवस्था भी की है यजूर्वेद•५•३•७•३१•में कहते हैं कि-
🌺#आयुर्वर्चोऽभिवृध्दिश्च_सिद्धिर्व्यवह्रतेस्तथा।।
आयु और तेजकी वृद्धि सांसारिक व्यवहारों में --
👌🏻 #सम्बोधनात्मक_उद्घोष_से_होती_ही_है!! 🌹

🌹 हे प्रिय!!हमारे ऋषियों नें ध्वनि-विज्ञान -- (Phonetics) तथा मनो-विज्ञान (Psychology)के आधार पर ही नामकरण की व्यवस्था की है,इस संदर्भ में पाराशरीय गृहसूत्र•१▪१७•२४▪में कहते भी हैं कि--
🍃#द्वयक्षरं_चतुरक्षरं_वा_घोषवदाद्यन्तरमन्तःस्थं।
🍁#दीर्घाभिनिष्ठानं_कृतं_कुर्यान्न_तद्धितम्।।
🍁#अयुजाक्षरमाकारांतंस्त्रियै_तद्धितम्।
🍁#शर्मब्राम्हरणस्य_वर्म_क्षत्रियस्य_गुप्तेतिवैश्यशुद्रम्

🍁 बालकके नामके प्रारंभ में #घोष जैसे कि-ग,घ, ज, झ,ड,ढ,द,ध,न,प,ब,भ,म,य,र,ल,व तथा ह इनमें से किसी अक्षरका चयन करें!तथा अंतमें दीर्घ-स्वरोंके साथ कृदन्त रखने का प्राविधान है!!तथा यह प्रकट भी है कि सभी शिशु प्रारंभ में #माँ जैसे घोष वाक्यों से ही बोलना प्रारम्भ भी करते हैं!!  🍃

🍁हे प्रिय!!कन्याओं के नामों में कोमलता,स्नेह, माधूर्य, सौन्दर्य,समर्पणादि गुणयुक्त प्राकृतिक स्त्रैणता युक्त नाम ही रखने चाहिये,परिणामतः जन्मसे ही इन घोष-सम्बोधनों से हममें तद्नुरूप गुणों का प्राकट्य होने से स्त्रीत्व-जनित माधूर्य का स्वबोध होगा ही! #यथा_नाम_तथा_गुणस्य! 🌺

🌹अतः ऐसा शुभ नामकरण राम,कृष्ण,ध्रूव,प्रहेलाद बुद्ध,सीता,सावित्री,राधा आदि रखनेकी परम्परा रही है!!तदोपरांत ऋषियों नें अथर्व वेद•८•२•१८•के श्लोक के अनुसार सात्विकता का संञ्चार करने हेतु-
अन्न-प्राशन संस्कारकी व्यवस्था दी है--
🌹#शिवौ_ते_स्तां_ब्रीहीयवावबीलासावदो_मधौ।
🌺#एतौ_यक्ष्मं_विबाधेते_ऐतौ_मुञ्चतो_अहंसः।।

🙏 जब हमारी संतान ६~७ मासकी हो जाती हैं!! उनकी पाचन-शक्ति परिपक्व होने लगती हैं! तब उन्हें क्रमशः पौष्टिक,सुपाच्य,स्निग्ध तथा सात्विक अन्नों को देने का संस्कार है यह!!मैं आपको एक विचित्र बात बताती हूँ!!मैं बंगाली हूँ,हमारे जातिगत संस्कार ही माँसाहारी हैं!!किंतु मेरे विचार से यह बिल्कुल ही गलत तथा प्रक्षेपित् अशास्त्रीय अमान्य संस्कार हैं!! 🌻और उसका कारण भी है कि हमारे यहाँ भी अन्न- प्राशन संस्कारों में ही क्या किन्ही भी संस्कारों में प्रथम--
#शाक_स्पर्श_तदोपरांत_ही_मांस_स्पर्षका_विधान_है

🌻आज हम अपनी संतानों को पाश्चत्यांऽनुकरणके कारण ये जो Fast food.Junk food देने लगे! जन्म से ही सैक्रीन से बनी टाॅफियाँ खिलाने लगे, अभक्ष्याऽभक्ष्य का विचार किये बिना गौ-मांस मिश्रित Cadbarias खिलाने लगे!!उसका दुष्परिणाम उनकी आँत,आँख तथा दाँतोंके कमजोर होते हम देख ही रहे हैं!!🌻

🌺 हे प्रिय!!मेरा उद्रेश्य आहार की शुद्धता से कहीं ज्यादा उसके उपलब्ध्य-स्रोतों पर भी आपके ध्यानाकर्षण  की है!!अन्यायोपार्जित धनादि विशय भोगोंसे हम आप स्वयम् तथा अपनी संतानों को एक प्रकार से सुवर्ण-निर्मित स्रुवा से हलाहल विषपान ही करा रहे हैं!!हम,आप और हमारे आश्रित सम्पूर्ण कुटुम्बको हम नर्कोंके द्वारों पर ढकेल रहे हैं!! 🌹 

शेष अगले अंकमें प्रस्तुत करती हूँ!! #आपकी_सखी_सुतपा" ......✍

Sunday, 10 February 2019